कैंसर उपचार के लिए नयी आशा Human Injected With Cancer-killing Virus Vaxinia

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मानव में कैंसर को मारने वाला वायरस-वैक्‍सीनिया- इंजेक्‍ट किया गया। इसके साथ ही पहली बार कैंसर को ठीक करने वाली दवा का मानव परीक्षण शुरू हो गया। यह कैंसर को लेकर एक राहत देने वाली ख़बर है । कैंसर और एड्स दो ऐसी बीमारियां हैं जिनका इलाज अभी तक नहीं खोजा जा सका है। कैंसर से भारत में हर साल 7,84,821लोगों की मौत हो जाती है। पूरी दुनिया में हर साल 96 लाख लोग कैसर के शिकार हो जाते हैं। यह ह्रदय संबंधी रोगों के बाद दूसरी सबसे मारक बीमारी है।

नयी दवा वैक्‍सीनिया वायरस है जो इंजेक्‍ट करने पर यह शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं का सफाया कर देती है। उपचार की इस विधि को ओंकोलाइटिक (Oncolytic) वायरस थेरेपी कहते हैं । इस विधि में प्राकृतिक वायरस में जीन संशोधन कर उसे तैयार किया जाता है। इस जीन संशोधन के कारण यह वायरस अपने को दोहराने (Replicate करने )का क्रम जारी रखता है और बिना सेहतमंद कोशिकाओं को कोई नुकसान पहुंचाए केवल कैंसर कोशिकाओं पर हमला कर उन्‍हें नष्‍ट करता जाता है। इस वायरस को CF33-hNIS कहा जाता जिसे वैक्‍सीनिया के नाम से भी जाना जाता है। यह एक पॉक्‍स वायरस है । इस उपचार को विकसित करने वाली अमेरिकी क्लिनिकन कैंसर रिसर्च कंपनी इम्‍यूजेन लिमिटेड और लॉस एंजेलिस स्थित कैंसर क्लिनिक सिटी ऑफ होप ने अताया कि पिछले 17 मई को पहले मरीज. को यह वायरस इंजेक्‍ट कर दिया गया ।

इस परीक्षण में दो वर्ष की अवधि के लिए अमेरिका और आस्‍ट्रेलिया से 100 मरीजों का चयन किया जाएगा । मानव परीक्षण के चरण तक आने के पहले किसी भी दवा को परीक्षणों के कई दौर से गुजरना पड.ता है । यह वायरस सीधे कैंसर की गांठ में इंजेक्‍ट किया जा सकता है या नसों के जरिये शरीर में पहुंचाया जा सकता है । परीक्षण के मुख्‍य अन्‍वेषक और सिटी ऑफ होप के डॉ डेनेंग ली ने बताया कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का भी काम करता है जिससे शरीर रोगों से लड. सके । उन्‍होंने कहा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के जरिये होने वाली चिकित्‍सा पर हमें और अधिक ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है और कैंसर से जंग में वैक्‍सीनिया अगर सफल रहता है प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित चिकित्‍सा के नये द्वार खुलेंगे।

अस्‍वीकरण – हालांकि इस परीक्षण को अमेरिकी नियामक संस्‍था एफडीए की मंजूरी मिल चुकी है। यह अपने आप में उपलब्धि है। पर, अभी ठोस उपचार से हम दूर हैं। जानवरों पर इसके परीक्षण के जो परिणाम मिले हैं वे पूर्व की अपेक्षा अधिक आशाजनक हैं। जानवरों के परीक्षण में मिली सफलताएं ज्‍यों की त्‍यों मानवो में नहीं दुहरायी जा सकती । इस खबर को इस तरह नहीं लिया जाना चाहिए कि कैंसर की नई दवा इजाद कर ली गयी जैसा पहले अखबारों में कई बार छप चुका है । दूसरे, परीक्षण के दौरान चयनित रोगियों के अलावा किसी और को खुराक भी नहीं दी जा सकती।क्‍योंकि ये महंगे तो होते ही हैं किसी अन्‍य मरीज को देने पर पूरी अनुसंधान श्रृंखला प्रभावित होती हैं।

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